Harihar Fort: Complete Information of Harihar Fort And History

Harihar Fort: Complete Information of Harihar Fort And History 

नमस्कार दोस्तों आपका हमारे वेबसाइट पर स्वागत है। आज दोस्तों हम ऐसे टूरिस्ट के बारे में बताने वाले हैं जो खतरनाक ट्रैकिंग के लिए जान जाते है।

दोस्तों आज होगी महाराष्ट्र राज्य में स्थित हरिहर किले के बारे में जानकारी प्राप्त करने वाले हैं। हरिहर किला महाराष्ट्र में स्थित एक ऐसा किला है जिसे खतरनाक ट्रेकिंग के लिए जाना जाता है।कई लोग घूमने फिरने के साथ-साथ ट्रैकिंग का शौक होता है। वह लोग यह हरिहर किले जैसी खतरनाक ट्रेकिंग का मजा ले सकते हैं। अगर आप भी खतरनाक जगह पर ट्रकिंग कर सकते हैं तो आपको भी महाराष्ट्र के ऐतिहासिक ट्रेकिंग स्थल पर जरूर जाना चाहिए।यह किला की विजिट करना हर किसी की बस की बात नहीं होती। क्योंकि यहां पर जाने के लिए आपको तकरीबन 80 डिग्रि के कोण पर बने छोटी-छोटी सीढ़ियों पर चढ़कर एवं पहाड़ों को छोटी हाइट में काटकर बनाई गई गलरिया से गुजरते हुऎ जाना होता है। हरिहर किला प्राचीन काल में बनाया गया था। और बाद में अहमदनगर के निजाम शाह ने उस पर अपना आधिपत्य जमाया था।  यह हरिहर किला अक्सर ट्रैकर एवं इतिहास प्रेमी द्वारा काफी अधिक पसंद किया जाता है।  तो आइये दोस्तो आज हम इस महाराष्ट्र के हरिहर किला के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करते है।


Harihar Fort Information(हरिहर किले के बारे में जानकारी)

Name / Location 

 Harihar, Nashik,  Maharashtra 

Height 

 170 Meter 

Type 

 Hill Fort 

Years Of Establishment 

 Seuna or Yadava Dynasty Between 9th and 14th Century  

Material Used 

 Stones, Bricks, alkali 

Nearest Railway Station 

 Nashik Railway Station (56 km),Kasara Railway Station(60 km)

Nearest International and Domestic Airport 

 Chhtrapati Shivaji Maharaj International Airport Mumbai(70 km) 

Risk Factor Grade 

 Medium 

Tracking Difficulty Level 

 Moderate to Challenging 

Base Village 

 Harshwadi; Nirgudpada or Kotamwadi (300 meters from Nirgudpada)

Track Distance (One Way)

  •  From Harshwadi 2.5 km 
  •  From Nirgudpada or Kotamwadi 3.4 km 

 Track Duration (One Way)

  •  From Harshwadi 2 Hours 
  • From Nirgudpada or Kotamwadi 2 Hours 30 Minuit 

 Best Time Of Visit 

 October to February ; June to August for Monsoon Track  

 Advise Of Group 

 Generally 15-50 Years 

हरिहर किल्ला महाराष्ट्र के नासिक शहर के पास में स्थित काफी मुश्किल ट्रेक वाला किला है। यहां पर हर किसी के जाने की बस की बात नहीं है। यहां पर जाने के लिए तकरीबन 80 डिग्री खड़ी पहाड़ी पर ट्रेकिन करना पड़ता है। हरिहर किला या हर्षगढ ऐसा ही एक किला है। जो सहयाद्री की हरी-भरी पहाड़ियों के उपस्थित है। जिसे पश्चिमी घाट के नाम से भी जाना जाता है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में इगतपुरी से 48 किमी दूर घोटि और नाशिक शहर दोनों से 40 किमी दूर स्थित है।किला तक पहुंचने के उपरांत आप यहां पर हनुमानजि,शिव जि के छोटे प्रतिमाओं का दर्शन भी कर सकते हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित किले के पास जाने के उपरांत यहां पर एक तालाब को भी देखा जा सकता है।इस महत्वपूर्ण किले का निर्माण महाराष्ट्र से गुजरात को जोड़ने वाले गोंडा घाट के माध्यम से व्यापार मार्ग को देखने के लिए किया गया था। आज यह साहसि ट्रेकर्स को अपनी 80 डिग्री की आंतरिक, अजीबोगरीब आकार के रोक-कट सिढिया के साथ आकर्षित करता है।इस किले का इतिहास 9वी से 14वि शताब्दी के बीच के समय का बताया जाता है। एवं किला वर्तमान समय में इतिहास प्रेमियों और ट्रैकर्स के द्वारा काफी ज्यादा विजिट किया जाता है।हरिहर किले का मुख्य प्रमुख आकर्षण यह है कि उसकी खड़ी चढाई है। यानी वहां जाने के लिए खतरे से खेलने से कम नहीं है। कई पर्यटक स्थलों से भरपुर यह किले के लिए पर्यटक देखने के लिए साल भर में आया करते हैं।

Harihar Fort History(हरिहर किला इतिहास)

हरिहर किला पश्चिमी घाट के त्र्यंबकेश्वर पर्वत श्रृंखला में स्थित है। किले की स्थापना सुनाया यादव राजवंश 9वी और 14वीं शताब्दी के बीच के समय की है। गोंडा घाट से गुजरात वाले व्यापार मार्ग की सुरक्षा के लिए किला काफी महत्वपूर्ण था।हरिहर किला का इतिहास 9वी और 14वीं शताब्दी के बीच यादव वंश के राजाओं से शुरू होता है। यह किले का निर्माण मुख्य निर्माण व्यापार के लिये किया गया था। लेकिन कुछ समय के पश्चात यहां ब्रिटिश सेना के साशन साम्राज्य का नियंत्रण के साथ-साथ उस किले पर आक्रमण किया और उस किले पर अपना साशन स्थापित किया। 



इसकि स्थापना के बाद हरिहर किला पर कई आक्रमणकारियो द्वारा आक्रमण किया गया। हरिहर किला का इतिहास 9वी और 14वीं शताब्दी के बीच यादव वंश के राजाओं से शुरू होता है। वैसे तो हरिहर गड यादव कुल के समय मे यानि 860-1317 के समय मे कहा जाता है। और इस किले पर कई आक्रमणकारियो ने हमला किया उस पर हमला वरो ने तब तक कब्जा किया जब तक कि ब्रिटिश सेना ने कब्जा नहि कर लिया। 

1636 मे त्र्यंबक के साथ खान जमाम का साशन था। उस समय 1636 मे हरिहर किला के साथ त्र्यंबक,त्रिंगलवाडि और कुछ अन्य पुना(यानि इस समय का पुणे)  किलो को शहाजि भोसले ने मुगल जनरल खान जमान को सौंप दिया था। उस समय हरिहर किला  का साम्राज्य उत्तर मे नर्मदा न दि से लेकर दक्षिण मे तुंगभद्रा नदि तक बिछा हुआ था। उस समय महाराष्ट्रा, उत्तर कर्नाटक,उर मध्य प्रदेश के कई विभाग शामिल थे। और यहा कि साम्राज्य कि राजधानि देवगिरि यान वर्तमान का औरंगाबाद जिले का दौलताबाद थि। यादवे यहा पहले पश्चिमि चालुक्य के सामंत थे। 12वि शताब्दि चालुक्य वंश के पतन के समय पश्यात यादव राजा भिलमा ने अपने अधिकार स्थापित किया था। उसके बाद राजा सिम्हा2 ने यादव साम्राज्य को बहुत हि ताकातवार बनालिया जो 14वि शताब्दि तक सफ़ल रहा।

हरिहर किला उतना हि मजबुत था। जिन्हे 1818 मे त्र्यंबक के पतन पर अंग्रेजो को सोंपा दिया गया था। और इन सभि किलो पर अंग्रेज केप्टन ब्रिग्स ने कब्जा कर लिया था।


हरिहर किले कि बनावट

कैप्टन ब्रिग्स ने हरिहर किला का काफी विस्तृत विवरण दिया है। हालांकि किले का अधिकांश हिस्सा समय की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका फिर भी इसकी संरचना प्रभावशाली है। आधे रास्ते तक पहुंचना सहनिय रूप से आसान है। पहाड़ी कि तलहटि से कई राश्ते और एक जलाशय और कुछ कुओ के साथ वहा एक जुट होते है। वहा पर चौकि के रुप मे कुछ घर भि थे, जो अब अस्तित्व मे नहि है।

निशान के लिए असली चढ़ाई यहां से शुरू होती है। और वास्तव में इसकी भयानक ढलान के साथ सांस लेने वालि है।इसके तलन लगभग 60 किलोमीटर के लिए पूरी तरह से जीता है ठीक 200 फीट ऊंची सीडी की तरह एक दीवार के खिलाफ सीता सेठ लेकिन चीटियां जगह-जगह से खराब और टूटी हुई है हाथों के सहारे देने के लिए चट्टान में छेद किए जाते हैं जिससे चीढियों की अजीबोगरीब आकृति बनती है।

हरिहर किला चीढियों के शीर्ष पर एक दरवाजा है। जो मानसिक रूप से जिर्ण है। दरवाजे के माध्यम से एक रोक-कट ट्रेवर्स के नीचे चलना है। बाहर किनारे पर कोई दीवार नहीं है इसलिए आपको ध्यान रखना चाहिए। गैलेरि के बाद चिढिया की पूरी उड़ान है यह उड़ान पहले से भी बदतर है। सिर्फ पर एक जाल दरवाजे पर समाप्त होती है। जिसमें केवल क्रोल करने के लिए पर्याप्त जगह होती है। यह गुफा जैसी संरचना की ओर जाता है अंत में शीर्ष पर विशाल क्षेत्र में अद्भुत आसपास के दृश्यों के साथ खुलता है।

वहां से सबसे ऊंची चोटी 10 से 15 मीनट आगे हैं। पुराने दिनों में किले में पानी और अन्य सुविधाओं की आपूर्ति की जाती थी। अहाते के भितर ऎक फ़ुस घर में अनाज और अन्य सामग्री रखी हुई थी। भंडारण गृह अभि भि एक छोटे से प्रवेश द्वार के साथ है।किले  के केंद्र में चट्टानों को काटकर बनाई गई पानी के कुंडों की एक शृखंला है। दुर्भाग्य से इसमे अब पानी नहि है।कुछ ट्रेकर्स द्वारा हाल ही में एक गहरे नीचे गुप्त स्थान की खोज की गई है। जो शायद या झेल या भंडारण था। किले के इस हिस्से तक पुराने टूटे और अधिक जोखिम भरे ट्रैकिंग मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

हरिहर किले कहा है?

भारत में महाराष्ट्र राज्य के नाशिक शहर से तकरीबन 40 किमी दूर 3500 फीट ऊंची पहाड़ी है उसके ऊपर हरिहर किला स्थित है। यह किले को हर्षगढ किला भी कहा जाता है। महाराष्ट्र में कई बड़े-बड़े और रहस्यमई किले हैं। जिसमें यह किला शामिल हैं। सभी कीले से यह अलग है। यह अपने समय में अपना ऐतिहासिक महत्व रखता था। लेकिन आज के समय के चलते इतिहास में यह किला गुम हो चुका है। यह किला हरी हरी पहाड़ी के बीच बना है जिस पर से उत्साहित लेकर ट्रेकिंग करना पसंद करते हैं।

हरिहर किले कि वास्तुकला

अगर दोस्तों हम हरिहर किला की वास्तुकला के बारे में बात करें तो हरिहर किला इतना बड़ा तो नहीं है लेकिन ट्रेकर्स के लिए जाना जाता है।इस हरिहर किला पर पहुंचना ट्रैकर्स का सपना होता है।हरिहर किला तक पहुंचने के लिए आपको तकरीबन 80 डिग्री के एंगल पर बनी सीधी चिड़िया पर ट्रेक करना और जाना होता है। और यहां और हाथों के सहारे भी चलना पड़ता है। समुद्र तल से तकरीबन 3500 फीट की ऊंचाई पर स्थित हरिहर किला एवं यहां से दिखने वाला दृश्य काफी ज्यादा आकर्षक होता है।

यह हरिहर किला शांत वातावरण में स्थित है। यह किला वैसे लोगों के लिए नहि है जिनको ऊंचाई से डर लगता है। जब आप  हरिहर किला को विजिट करेंगे तो यहां पर आपको एक छोटी सी हनुमान जी की प्रतिमा के साथ-साथ शिव जी की प्रतिमा देखने को मिलेगा। इसके अलावा यहां पर कई पानी की टंकी भी देखने को मिल जाती है। पहाड़ के ऊपर चोटी पर बने इस हरिहर किला तक पहुंचने के लिए आपको वो रोक-कट चिढिया एवं पहाड़ों को खोदकर बनी गुफ़ा से होकर गुजरना पड़ता है जो काफी ज्यादा साहसि लोगो का काम होता है।


हरिहर किले ट्रेकिंग

हरिहर किला ट्रैक के बारे में अभूतपूर्व बात यह है कि यह सरकार से आकार में आयत का प्रतीत होता है।हरिहर किला वास्तव में चट्टान के त्रिकोणीय प्रिंज्म में पर बना है। चट्टान के किनारे लंबवत है। जो इस प्राचीन किले की विशिष्ट विशेषताएं है। यह लंबवत सीढ़ियां ट्रैक का मुख्य आकर्षण है जो इसे पूरी सहयाद्री रेंज में सबसे प्रतिष्ठित चढ़ाई बताते हैं।हरिहर किला एक निरीक्षण किले के रूप में कार्य करता था। क्योंकि गोंडा घाट के व्यापार मार्ग पर ध्यान रखने के लिए उसका उपयोग हुआ करता थ यह फोर्ट यूरो कट शिर्डीया अक्सर साहसिक प्रेमियो को बहुत आकर्षित करती है।

हरिहर किल्ला एक 170 मीटर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। इस पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के लिए आपको तकरीबन 80 डिग्री के कोण पर बने सीधी छोटी छोटी चिढिया पर चढकर इस किले का विजिट करना पड़ता है। हरिहर किल्ला छोटा है फिर भी काफी मांग वाला है। चढ़ाई का आखिरी 200 फ़िट खड़ी चट्टानों को काटकर सीडीओ के माध्यम से एक नर्व रैकिंग चढ़ाई है। चीढियों को कुल मिलाकर लगभग 200 सिढिया है और 80 डिग्री पर झुकी हुई है। उतरना विशेष रूप से प्राण पोषक है क्योंकि आपको नीचे उतरना होता है और एक बिंदु पर 500 फीट की गिरावट का सामना करना पड़ता है।हरिहर किल्ला काफी ज्यादा खतरनाक माना जाता है।यहां पर हर किसी का जाना बस की बात नहीं है। 

यहां पर हर किसी का जाना बस की बात नहीं है।यहां आपको इतिहास प्रकृति और रोमांच का सही मिश्रण देखने को मिलता है। जो सभी के दिलों को आकर्षित करता है।  एक काफी खड़ी पहाड़ी पर बना हरिहर किला तक पहुंचने के लिए बनाई सीढ़ियां सिधि रहती है। आपको वहां जाने के लिए यात्री को दोनों हाथों के साथ और पैरों का उपयोग करना होता है।हरिहर किला का ट्रेकिंग गोरसवाड़ी और निर्गुडपाड़ा गांव से शुरू होता है।

हरिहर किला क्यो बनावाया गया?

  • हरिहर गड इतिहास देखे तो वही लड़की लाभदायक होता और के तौर पर बनाएंगे दिया था।
  • यह महल को राज परिवार को दुश्मनों के हमले से बचाने के लिए किया जाता था।
  • यह महल को एक हवा महल के रूप में राज परिवार को गर्मियों में ठंडक देने के लिए किया गया था।
  • हरिहर किला से वातावरण की जानकारी और बरसात का अनुमान लगाया जाता था।
हरिहर किला तक कैसे पहुंचे

हरिहर किला पहुंचने के लिए आप किसी भी माध्यम जैसे कि हवाइ मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग का चुनाव कर हरिहर किला तक आसानी से पहुंच सकते हैं।  अगर दोस्तों आप हरिहर किला जाने के लिए प्लान बना रहे है तो आइये दोस्तो जानते है कि  आप वहां तक कैसे जा सकते है।

रेल्वे मार्ग से:- दोस्तों हरिहर किला जाने के लिए रेडी है। तो दोस्तो आप ट्रेन की मदद से वहां तक जा सकते हैं। आपको बता दें कि हरिहर किला  से नासिक रेलवे स्टेशन 56 की और कसारा रेलवे स्टेशन 60 किमी दूर है। आप वहा उत्तर कर यात्री बहुत आसानी से बस या टैक्सी की सहायता से हरिहर किला पहुंच सकते हैं।

सडक मार्ग से:- दोस्तों हरिहर किला जाने के लिए रेडी है। अंगर दोस्तो आप भि हरिहर किला  जाने के लिए सड़क मार्ग को पसंद करते हैं। तो आपको बता दे कि यहां तक जाने के लिए सड़क मार्ग से सीधा बहि जा सकते क्योंकि पहाड़ों पर होने के कारण सड़क मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता। लेकिन आप नासिक एवं कसारा तक बस टैक्सी या कैब कि सहायता से पहुंच कर जा सकते हैं। और वहां से शिखर तक जाने के लिए आपको रोक-कट कदम उठाकर पहाड़ी को ट्रैक करना पड़ता है।

फ़्लाइट मार्ग से:- दोस्तों हरिहर किला जाने के लिए रेडी है।दोस्तों अगर आप हरिहर किला जाने के लिए फ्लाइट को पसंद करते हो। तो यहां से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मुंबई है। यह हवाई अड्डा 170 किमी दूर स्थित है।यह हवाई अड्डे से यात्रियों को हरियार किले के लिए सीधी टैक्सी भी मिलती है। जिसकी सहायता से आप मुंबई से नासिक और फिर वहां से हरिहर किले के लिए एक बस या टैक्सी से पहुंच सकते हैं। नासिक शहर से 40 किमी दूर है।

हरिहर किला घुमने जाने का सबसे अच्छा समय

हरिहर किला को विजिट करने के बारे में बात करें तो आप यहां पर अपनी सुविधा और अनुकुणता के अनुसार पूरे साल में कभी भी घूमने जा सकते हैं। लेकिन दोस्तों आपके अनुकूलता के अनुसार आप वहां जा सकते हो यहां पर जाने का अच्छा समय अक्टूबर से मार्च महीने के बीच में सबसे अच्छा समझ माना जाता है। और खास करके आप वर्षा ऋतु के दौरान वहा काफ़ि आकर्षक दिखता है लेकिन यहां पर वर्षा ऋतु में खासकर जाने से बचे। यहां पर बारिश हो रही हो उस समय जाना काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए जितना हो सके आप यहां पर वर्षा ऋतु के दौरान जाने से बचे। इसकेअलावा अगर आप हरिहर किला जाना चाहते हो और अपने परिवार के साथ जाना चाहते हो तो आप वीकेंड के दौरान जाने से बचें क्योंकि विकेंड के समय वहां पर लोगों की काफी संख्या में भीड़ होती है। और चिढिया चडने में काफी मुश्किल हो सकती है।और किले तक पहुंचने में ज्यादा से ज्यादा समय लग सकता है।हरिहर किला जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च महीने में है।


Khandar Fort


Tag:-harihar trek ,harihar gad ,harihar fort trekking
दोस्तो आज हमने बताया कि हरिहर किला कहा है। और उनसे जुडि हर माहिति को आपको साझा करने कि कोशिश कि है। यदि आपको इस पोस्ट मे कमि दिखति है तो आप हमे कोमेन्ट करके बता सकते हो।
अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे ,,,''धन्यवाद''

Comments